मसौदा लेखन : अर्थ, प्रयोजन, प्रकार और मार्गदर्शक सिद्धांत
कार्यालयी कार्यप्रणाली में टिप्पणी और मसौदा लेखन का विशेष महत्व है। टिप्पणी में किसी मामले का परीक्षण, विश्लेषण और निर्णय के लिए सुझाव प्रस्तुत किए जाते हैं, जबकि मसौदा उस निर्णय का प्रारूप होता है, जिसे अनुमोदन प्राप्त होने के बाद पत्र, ज्ञापन, आदेश या अन्य कार्यालयी दस्तावेज के रूप में जारी किया जाता है।
इसलिए मसौदा लेखन सरकारी पत्राचार की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। मसौदे की भाषा, शैली और प्रस्तुति जितनी स्पष्ट, संक्षिप्त और सटीक होगी, अनुमोदन की प्रक्रिया उतनी ही सरल होगी तथा अंतिम प्रति तैयार करते समय त्रुटियों की संभावना उतनी ही कम होगी।
1. मसौदा क्या है?
किसी कार्यालय से भेजे जाने वाले पत्राचार के उस प्रारंभिक रूप को मसौदा (ड्राफ्ट) अथवा प्रारूप कहते हैं, जिसे अनुमोदन, संशोधन तथा आवश्यक परिवर्तन के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।
अनुमोदन प्राप्त होने के बाद इसी मसौदे के आधार पर स्वच्छ प्रति तैयार की जाती है और उसे संबंधित व्यक्ति, संस्था या कार्यालय को भेजा जाता है।
2. मसौदा लेखन का प्रयोजन
अधिकारी के निर्णय अथवा अनुमोदित कार्रवाई को स्पष्ट, औपचारिक और प्रभावी भाषा में व्यक्त करना।
पत्र जारी होने से पहले सक्षम प्राधिकारी को उसमें आवश्यक संशोधन अथवा परिवर्तन करने का अवसर प्रदान करना।
टंकक/कंप्यूटर ऑपरेटर, मिलानकर्ता और प्रेषण शाखा को आवश्यक निर्देश देकर आगे की कार्रवाई को सरल बनाना।
कार्यालय से निर्गत होने वाले पत्राचार में भाषा, शैली और प्रस्तुति की एकरूपता बनाए रखना।
निर्णय को उचित प्रशासनिक एवं विधिक भाषा में अभिव्यक्त करना।
3. मसौदे के प्रकार
सुविधा की दृष्टि से मसौदा लेखन को दो भागों में बाँटा जा सकता है।
(क) प्रारंभिक मसौदा लेखन
इसके अंतर्गत सामान्य और नियमित कार्यालयी पत्राचार आते हैं, जैसे:
आवेदन पत्र
पृष्ठांकन
सामान्य पत्र
स्मरण पत्र या अनुस्मारक
अंतरिम उत्तर
दौरा कार्यक्रम
अर्ध-सरकारी पत्र
कार्यालय आदेश
(ख) उच्चतर मसौदा लेखन
इसके अंतर्गत अपेक्षाकृत अधिक औपचारिक और व्यापक प्रभाव वाले दस्तावेज आते हैं, जैसे:
कार्यालय ज्ञापन
अधिसूचना
संकल्प
आदेश
परिपत्र
अंतर्विभागीय टिप्पणी
4. मसौदा कब और कैसे तैयार किया जाए?
प्रत्येक मामले में मसौदा तैयार करना आवश्यक नहीं होता। स्थिति के अनुसार निम्न प्रक्रिया अपनाई जाती है:
सामान्य और बार-बार आने वाले मामले: ऐसे मामलों के लिए यदि मानक मसौदे मौजूद हों और जिनमें कोई विशेष निर्णय अपेक्षित न हो, तो सामान्यतः अलग से मसौदा तैयार नहीं किया जाता। उत्तर की स्वच्छ प्रति सीधे हस्ताक्षर के लिए उपयुक्त अधिकारी को प्रस्तुत कर दी जाती है।
कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो: जब मामले में की जाने वाली कार्रवाई बिलकुल स्पष्ट हो और टिप्पणी आवश्यक न हो, तब मामले की जाँच के बाद सीधे मसौदा अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है। यदि दिशा स्पष्ट न हो, तो पहले सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमोदन लिया जाता है और उसके बाद मसौदा तैयार किया जाता है।
अधिकारी द्वारा निर्णय लिए जाने के बाद: ऐसी स्थिति में अधिकारी अपने हस्ताक्षर के लिए स्वच्छ प्रति बनवा सकता है, पत्र जारी करने का निर्देश दे सकता है, या मसौदा तैयार करवाकर अनुमोदन के लिए सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत कर सकता है।
5. मसौदा तैयार करने के मार्गदर्शक सिद्धांत
मसौदा तैयार करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
(1) भाषा और शैली
स्पष्टता और संक्षिप्तता: मसौदे की भाषा सरल, स्पष्ट और संक्षिप्त होनी चाहिए। ऐसी भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए जिसका गलत अर्थ न लगाया जा सके।
अनावश्यक विस्तार से बचाव: मसौदे में लंबे और जटिल वाक्यों, अनावश्यक शब्दों, घुमा-फिराकर या बढ़ा-चढ़ाकर कहने और विचारों की पुनरावृत्ति से बचना चाहिए।
तटस्थता और गरिमा: भाषा प्रशासनिक, संयमित और तर्कसंगत होनी चाहिए। व्यक्तिगत आक्षेप या कठोर शब्दों का प्रयोग न करें।
सारांश: पत्र कुछ लंबा या जटिल हो, तो अंत में आवश्यकतानुसार सारी बात का सार दे देना चाहिए।
(2) विषय, संदर्भ और मिसिल (फाइल) संख्या
विषय: जहाँ आवश्यक हो, स्मरण पत्रों सहित सभी पत्रों में स्पष्ट विषय दिया जाना चाहिए।
पूर्व पत्राचार का संदर्भ: मसौदे में पूर्व पत्राचार का संदर्भ क्रम संख्या और तारीख सहित दिया जाना चाहिए। यदि पूर्व पत्राचार का अंतिम पत्र प्राप्तकर्ता की ओर से प्राप्त न हुआ हो, तो इस विषय पर प्राप्तकर्ता द्वारा भेजे गए अंतिम पत्र का भी उल्लेख किया जाए। एक से अधिक पत्रों या पत्र-व्यवहार के पूरे सिलसिले का हवाला देना आवश्यक हो, तो उसे मसौदे के हाशिए में दिया जाए।
फाइल (मिसिल) संख्या: फाइल में रखे गए सभी मसौदों पर फाइल संख्या लिखी होनी चाहिए। यदि एक ही फाइल में एक ही पते पर एक ही तारीख को दो या अधिक पत्र भेजे जाने हों, तो उन पर अलग-अलग क्रम संख्या लिखी जाए, ताकि हवाले में भ्रम न हो। जैसे: (i) 213/154-स्था. एवं (ii) 213/154-स्था.।
(3) संलग्नक
मसौदे से यह स्पष्ट पता चलना चाहिए कि स्वच्छ प्रति के साथ कितने संलग्नक भेजे जाएँगे। कंप्यूटर ऑपरेटर, मिलानकर्ता और प्रेषक के तत्काल हवाले के लिए हाशिए में उपयुक्त स्थलों पर छोटी तिरछी रेखाएँ बना देनी चाहिए।
मसौदे में जिन संलग्न पत्रों का हवाला हो, उनकी प्रतियाँ यदि पहले से मौजूद हों और उन्हें टाइप करने की जरूरत न हो, तो संगत तिरछी रेखा के नीचे हाशिए में इसका संकेत दे दिया जाए।
(4) डाक द्वारा भेजना
यदि पत्र महत्वपूर्ण हो (जैसे लाइसेंस रद्द करने या किसी विद्यमान सुविधा को वापस लेने का नोटिस) या उसके साथ मूल्यवान दस्तावेज हों (जैसे करार, सेवा पंजी या चेक), तो उसे रजिस्ट्री डाक, बीमाकृत लिफाफे अथवा डाक प्रमाणपत्र के अधीन, जैसा उचित हो, भेजा जाए।
(5) हस्ताक्षरकर्ता अधिकारी का विवरण
मसौदे में हस्ताक्षरकर्ता अधिकारी का नाम, पदनाम और टेलीफोन नंबर अनिवार्य रूप से दिया जाए।
(6) प्रस्तुति, गोपनीयता और अनुमोदन
हाशिया और अंतर: मसौदा तैयार करते समय काफी हाशिया छोड़ा जाए और पंक्तियों के बीच भी पर्याप्त अंतर रखा जाए, ताकि शब्द जोड़ने या उनकी व्याख्या करने की गुंजाइश रहे।
गोपनीयता का अंकन: यदि पत्र गोपनीय, अति-गोपनीय या प्रतिबंधित श्रेणी का है, तो मसौदे के शीर्ष पर मध्य में 'गोपनीय' (Confidential) या 'गुप्त' (Secret) अंकित किया जाना चाहिए।
अनुमोदन की पर्ची: मसौदे के साथ 'अनुमोदनार्थ मसौदा' की पर्ची लगाई जाए। एक ही फाइल में एक से अधिक मसौदे हों, तो मसौदों और उनकी पर्चियों पर 'अ. म. 1', 'अ. म. 2', 'अ. म. 3' आदि अंकित किया जाए।
तत्काल या प्राथमिकता: तत्काल अथवा प्राथमिकता से जारी होने वाले मसौदों पर 'तत्काल' अथवा 'प्राथमिकता' अंकित किया जाए।
आद्यक्षर: मसौदा तैयार करने वाले कर्मचारी/अधिकारी को मसौदे के नीचे बाईं ओर अपने आद्यक्षर करने चाहिए। सक्षम प्राधिकारी मसौदे के अनुमोदन के संकेत के रूप में निर्धारित स्थान पर अपने आद्यक्षर करता है।
(7) पत्र के प्रकार के अनुसार पुरुष (Person) और भाषा-शैली का प्रयोग
कार्यालयी पत्र / ज्ञापन (Official Letter / Memorandum): इनमें सामान्यतः अन्य पुरुष/प्रथम पुरुष (Third Person) का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण: "मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि..."
उदाहरण: "उक्त विषय में सूचित किया जाता है कि..."
अर्ध-सरकारी पत्र (Demi-Official / D.O. Letter): इनमें उत्तम पुरुष (First Person) का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण: "मैं आपका ध्यान इस विषय की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ..."
उदाहरण: "मैं आपसे अनुरोध करता हूँ..."
उदाहरण: "मुझे विश्वास है कि आप इस विषय पर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।"
6. निष्कर्ष
मसौदा लेखन का उद्देश्य अनुमोदित निर्णय को सही, स्पष्ट और सुव्यवस्थित रूप में पत्र का आकार देना है। सरल भाषा, उचित संदर्भ, स्पष्ट संलग्नक-संकेत, अधिकारी का पूरा विवरण और अनुमोदन की सही प्रक्रिया, इन सभी बातों से मसौदा उपयोगी और त्रुटिरहित बनता है। इसलिए हर मसौदा लिखते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि उसे पढ़कर अनुमोदन करने वाले अधिकारी और प्राप्तकर्ता, दोनों को कोई संदेह न रहे।
बहुत सुंदर और उपयोगी लेख है